क्या आप जानते हैं इस रहस्यमयी नगर के बारे में जहाँ पांडवों ने बिताया था 1 वर्ष का अज्ञातवास ?

महाभारत के बारे में अगर आपको थोड़ी भी जानकारी है तो आपने पांडवों के 12 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष के अज्ञातवास के बारे में जरूर सुना होगा। लेकिन क्या आपको पता है की पांडवो ने अपना 1 साल का अज्ञातवास कहाँ बिताया था? आज हम आपको राजस्थान की उसी जगह के बारे में बताने वाले हैं जो आज भी रहस्यों से भरी है।

साथ ही यहाँ कुछ बेहद रहस्यमयी आकार की कुछ चट्टानें और कुछ बेहद प्राचीन बौद्ध स्तूप भी मौजूद हैं। और खास बात तो यह है की राजस्थान में आस पास के इलाकों में आपको इस तरह की चट्टानों वाली और कोई पहाड़ी नहीं मिलेगी जैसी यहाँ “बीजक की पहाड़ी” पर मौजूद है। आज भी आप यहाँ जायेंगे तो आपको इस जगह का रहस्यों से भरा होने का एहसास तो जरूर होगा।

जी हाँ हम बात कर रहे हैं राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित विराट नगर की। तो चलिए ले चलते है आपको हमारी विराट नगर की यात्रा पर……

विराट नगर राजस्थान के अलवर शहर से करीब 60 किलोमीटर और जयपुर शहर से करीब 90 किलोमीटर दूर है और अगर आप जयपुर की तरफ से आ रहे हैं तो आपको विराट नगर से पहले सरिस्का के घने जंगलो वाले रास्ते से होकर गुजरना होगा और अगर आप बारिश के मौसम में यहां से गुजरेंगे तो आपको ये रास्ता पूरा हरियाली से भरा मिलेगा और साथ में अगर कुछ जीव जंतु भी दिख जाएँ तो ये आपकी एक यादगार रोड ट्रिप हो जाएगी।

तो हम जब विराट नगर से करीब 10 किलोमीटर दूर थे तब हमें अचानक से पहाड़ो की हरियाली बढ़ी हुई दिखने लगी और हमें समझ आ गया की कुछ तो स्पेशल है इस विराट नगर में। कुछ दूर चलकर हम विराट नगर पहुँच गए और वहां बस स्टैंड से करीब 3 किलोमीटर दूर सबसे पहले हम बीजक की पहाड़ी पर गए। यहाँ पहुँचते ही हमें यहाँ चट्टानों के अद्भुत आकार दिखे जिसे देखकर हम अचंभित थे क्योंकि हमने पुरे रास्ते में तो क्या बल्कि पुरे राजस्थान में इस तरह की चट्टानें नहीं देखी थी। 

यहाँ से ऊपर चढ़कर हम करीब आधे घंटे बाद ऊपर पहुंचे जहाँ सबसे पहले हमें एक विशाल जानवर रुपी चट्टान दिखी जिसके नीचे एक हनुमान मंदिर था। इस प्राकृतिक रूप से स्थापित इस चट्टान के नीचे किसी के निवास जितनी बड़ी गुफा में हनुमान जी का मंदिर था। हमने वहां दर्शन किये और फिर बाहर देखा तो पाया की पीछे की और भी एक खिड़कीनुमा जगह थी जो इस गुफा के अंदर खुल रही थी। 

यहाँ से ऊपर हम जब दूसरे धरातल पर गए तो वहां हमें बेहद प्राचीन बौद्ध स्तूप दिखा। विराट नगर में मौर्य सम्राट के कुछ शिलालेख भी मिलें है जिसे एक स्थानीय म्यूजियम में रखा हुआ है। और साथ ही खुदाई में मिले सबूतों से ये पता चलता है की ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी और वर्त्तमान युग की पहली शताब्दी के बीच विराट नगर एक बेहद संपन्न शहर था।

यहाँ से कुछ ऊपर की और लगभग 20-30 सीढियाँ चढ़कर हम इस बीजक की पहाड़ी के टॉप पर पहुंचे जहाँ हमें एक चट्टानों से बनी झोपडी जैसी आकृति दिखी और इसे देखकर हम सच में अचंभित थे और कहा जाता है की यहाँ जो नीचे की तरफ बने आयताकार पत्थरों से बनी लकीरें वास्तव में किसी समय बौद्ध भिक्षुओं के कक्ष हुआ करते थे। 

आपको बता दें की यहाँ बीजक की पहाड़ी˝ के अलावा भी कुछ और जगहें है घूमने लायक और अगर आप उसकी जानकारी चाहते हैं तो नीचे दिए हुए लिंक के द्वारा हमारे Youtube चैनल WE and IHANA पर जा सकते हैं। 

https://youtube.com/c/WEandIHANA

विराट नगर कैसे पहुंचे ?

रेल मार्ग द्वारा: 
यहाँ अगर आप रेल मार्ग द्वारा आना चाहते हैं तो आपको बता दें की अलवर रेलवे स्टेशन यहाँ से करीब 60 किलोमीटर दूर है और जयपुर का रेलवे स्टेशन यहाँ से करीब 90 किलोमीटर दूर है और दोनों ही शहरों से आप टैक्सी या बस के द्वारा विराट नगर आसानी से पहुँच सकते हैं।

सड़क मार्ग द्वारा :

आप पहले जयपुर या अलवर शहर जो भी आपके शहर से निकटतम हो वहां पहुंच सकते हैं और फिर वहां से आसानी से विराट नगर पहुँच सकते हैं।

हवाई मार्ग द्वारा:
एयरपोर्ट की बात करें तो निकटतम हवाई अड्डा जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जो की भारत के सभी बड़े शहरों से हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।