उत्तराखंड में भीड़ से दूर घने जंगलों के बीच, नदी किनारे मौजूद है ये सुकून से भरी खूबसूरत जगह !

अप्रैल का महीना शुरू हो चूका है और इसी के साथ पुरे भारत में पर्यटन का पीक सीजन भी शुरू हो चूका है। पर्यटन की दुनिया में पहाड़ी राज्य उत्तराखंड का एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान है ये तो आप सभी को पता ही होगा लेकिन आम तौर पर अगर उत्तराखंड में  घूमने की जगहों की बात करें तो ज्यादातर पर्यटक मसूरी, नैनीताल जैसी फेमस जगहों के बारे में ही जानते हैं जो की प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत तो हैं लेकिन इतने लोकप्रिय हैं की हमेशा पर्यटकों की भीड़ से भरे रहते है खास तौर पर पीक सीजन में।

इसी वजह से बहुत से पर्यटक ऐसी जगह की तलाश में रहते हैं जहाँ वो भीड़ से दूर प्रकृति के बेहद करीब रहकर कुछ समय सुकून के साथ बिता सकें। और आप भी अगर कोई ऐसी जगह ढूंढ रहें हैं तो आज का हमारा ये आर्टिकल आप ही के लिए है।

हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड में पौड़ी गढ़वाल के पौराणिक नगरी कोटद्वार में स्थित कण्वाश्रम की। कोटद्वार में ये जगह घने जंगलों के बीच मालिनी नदी के किनारे मौजूद है। कोटद्वार शहर से करीब 10 किलोमीटर कण्वाश्रम जाते वक़्त रास्ते में ही आप अपने आप को प्रकृति के करीब जाते हुए महसूस करेंगे। नदी के बहते पानी की हल्की सी आवाज और सामने की ओर दिख रही थी हरी-भरी पहाड़ियाँ, ऐसे ही कुछ शानदार व मनमोहक नज़ारों के साथ आप जल्द ही कण्वाश्रम पहुंच जाते हैं।


यहाँ पहुँचने पर आपको कुछ पर्यटक दिख जायेंगे साथ ही मालिनी नदी पर बना एक पुल दिखेगा जिसके पास पर्यटक अपना वाहन पार्क करके आगे आश्रम तक पैदल ही जाते हैं। इस पुल के साथ भी पर्यटक आपको कुछ फोटोज क्लिक करते दिख जायेंगे।

यहाँ अपना वाहन पार्क करके आप नीचे सुन्दर बहती मालिनी नदी का खूबसूरत नज़ारा देख सकते हैं जिसे देखने भर से ही आपको यहाँ आने का निर्णय बिलकुल सही लगेगा। कुछ नीचे उतरकर आप नदी किनारे जा सकते हैं जहाँ एक छोटा झरना भी आपकी इस यात्रा के अनुभव  को और भी अच्छा बनाने के लिए मौजूद है। साथ ही यहाँ आप सुकून से नदी किनारे बैठकर अपने आप को प्रकृति के बेहद करीब महसूस तो कर ही सकते हैं साथ ही ढेरों शानदार फोटोज भी ले सकते हैं।



एकदम साफ़ बहती खूबसूरत मालिनी नदी और कण्वाश्रम का भारतवर्ष के पौराणिक इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसा बताया जाता है की सम्राट भरत जिनके नाम पर हमारे देश का नाम भारत रखा गया था ये स्थान उनकी जन्मस्थली है। ये जानकारी अपने आप में इस स्थान को एक बेहद अद्भुत स्थान बना देती है। कण्वाश्रम में ऊपर की ओर भरत मंदिर भी मौजूद है जहाँ आपको जरूर जाना चाहिए। आश्रम का माहौल बहुत शांत व सुकून भरा रहता है… यहाँ एक हरा-भरा बगीचा भी है और बीच में राजकुमार भरत और ऋषि कण्व का मंदिर है। वहां राजकुमार भरत को शेर के दांत गिनते हुए दिखाया गया है।


यहाँ जाने के लिए आपको किसी भी मौसम का इंतज़ार करने की जरुरत नहीं है क्योंकि प्राकृतिक खूबसूरती से घिरी ये जगह पुरे साल पर्यटकों को बेहद शानदार अनुभव देती है।

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