‘धरती के स्वर्ग’ कश्मीर में आखिर यहाँ छिपा है प्रकृति का सबसे खूबसूरत उपहार !

हमारे कश्मीर की खूबसूरती के दीवाने सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मौजूद हैं। आखिर इसे धरती पर मौजूद स्वर्ग क्यों कहा जाता है, इस सवाल का जवाब आपको कश्मीर की एक छोटी सी यात्रा भी आसानी से दे सकती है। कश्मीर जाने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है और आम तौर पर ये पर्यटक कश्मीर की कुछ दिनों की ही यात्रा प्लान करते हैं।

लेकिन आप इस बात से भी सहमत जरूर करेंगे की कश्मीर की अद्भुत प्राकृतिक खूबसूरती कुछ दिनों में देख पाना बिलकुल नामुमकिन है। इसीलिए कश्मीर की अनेकों अद्भुत जगहें पर्यटकों से मिस हो ही जाती हैं। इसीलिए आज के हमारे इस लेख में हम आपको कश्मीर में अपनी अनोखी खूबसूरती के लिए पहचाने जाने वाले पहलगाम की एक शानदार पर छिपी हुई जगह के बारे में बताने वाले हैं जो अक्सर पर्यटकों से मिस हो जाया करती है। तो चलिए बताते हैं आपको इसकी पूरी जानकारी..

बैसरन वैली, पहलगाम
पहलगाम वैसे तो अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान के तौर पर जाना जाता है लेकिन अगर बात करें प्राकृतिक खूबसूरती की तो पहलगाम को कुदरत ने अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता देने में कोई कमी नहीं छोड़ी है।

चाहे बात करें यहाँ बहने वाली क्रिस्टल ब्लू रंग की लिद्दर नदी (लीडर नदी) की या फिर यहाँ दिखने वाली बेहद खूबसूरत घाटियों की, पहलगाम में जहाँ आपकी नज़र जाएगी आपको कुदरत के इस करिश्में के आगे नतमस्तक जरूर हो जायेंगे। इसी पहलगाम में मार्केट से कुछ दुरी पर स्थित है बैसरन घाटी जो अपने विशाल घास के मैदान और उसके पीछे अनगिनत देवदार के पेड़ों के लिए जानी जाती है।

इसके अलावा इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगाती हैं बैकग्राउंड में बेहद ऊँची और बर्फ से ढकी पर्वतमालाएं और इन सब के साथ जो नज़ारा ये जगह पेश करती है उसी वजह से बैसरन वैली को ‘ मिनी स्विट्ज़रलैंड’ के नाम से भी जाना जाता है।

यहाँ जाने का बेस्ट समय?
बैसरन घाटी हो या फिर पूरा कश्मीर, आप साल में किसी भी मौसम में जाते हैं तो आपको प्राकृतिक खूबसूरती का एक अलग ही रूप दिखाई देगा और इसीलिए आप किसी भी समय बैसरन वैली की यात्रा कर सकते हैं।

सर्दी के मौसम मतलब दिसम्बर से फरवरी या फिर मार्च महीने तक की बात करें तो इस मौसम में आपको यह खूबसूरत वैली चारों ओर बर्फ की सफ़ेद चादर ओढ़े बेहद शानदार लगने वाली है और वहीं गर्मियों में अप्रैल से जून तक आपको हर तरह घनी हरियाली और इस विशाल घास के मैदान के साथ बर्फ से ढके ऊँचे-ऊँचे पर्वत दिखाई देंगे।

वहीं अगर आप बारिश के मौसम में जाते हैं तो घाटी में हरियाली तो अच्छे से मिलने वाली है बस उन पर्वतों पर बर्फ की सफ़ेद चादर की जगह भूरे और गहरे हरे रंग की पहाड़ियां दिखेगी जिससे इस सुन्दर मिनी स्विट्ज़रलैंड का एक नया और खूबसूरत रूप आपको दिखाई देता है।


टिकट और प्रवेश समय

इस सुन्दर घाटी में वैसे हमें कोई निश्चित प्रवेश समय जैसा नहीं दिखा लेकिन यहाँ चूँकि आपको करीब 1-1.5 घंटे का ट्रेक करके या फिर घोड़े वगैरह करके जाना होता है जहाँ रास्ते में आपको लाइट्स जैसी सुविधाएँ नहीं मिलेगी जिससे इस जगह आप सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही जाने का प्लान करें। यहाँ प्रवेश के लिए आपको 30 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से टिकट लेना होता है।

बैसरन घाटी में मौजूद रेस्टोरेंट्स

कैसे पहुंचे?

यहाँ पहुँचने के लिए अगर आप घोड़ों से जाना चाहते हैं तो आप चाहें तो पहलगाम मार्केट से भी घोड़े कर सकते हैं। मार्केट से बैसरन वैली के ट्रेक की शुरुआत जहाँ से होती है उस स्थान की दुरी करीब 3 किलोमीटर है। फिर वहां से बैसरन घाटी आप चाहें तो पैदल या फिर घोड़ों के साथ जा सकते हैं। पैदल ट्रेक करने में करीब 1-1.5 घंटे का समय लगता है।

यह पूरा ट्रेक वैसे 5 किलोमीटर का बताया जाता है जिसमें रास्ते में ही बीच में भी कुछ टूरिस्ट पॉइंट्स आते हैं जैसे पहलगाम वैली व्यू पॉइंट और कश्मीर वैली व्यू पॉइंट। लेकिन पैदल जाते समय कुछ शॉर्टकट वगैरह लेते हुए आप आसानी से 1-1.5 घंटे में बैसरन वैली तक पहुँच सकते हैं क्योंकि यह कोई मुश्किल ट्रेक नहीं है।

लेकिन कश्मीर की वादियों में घोड़े की सवारी का भी अपना अलग ही आनंद है तो इसीलिए आप अपनी सुविधानुसार विकल्प चुन सकते हैं। घोड़े वाले आपको पहलगाम के मार्केट में या फिर कुछ उस ट्रेक की शुरुआत में भी मिल सकते हैं जहाँ तक आप टैक्सी या फिर खुद के वाहन से जा सकते हैं।

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