क्या आपको पता है भारत के इस मंदिर के बारे में जहाँ पुरुषों का जाना है मना, दर्शन के लिए ज़रूरी है करना ये काम

Kottankulangara-temple

भारत में बहुत से मंदिर है। आपने आजतक ऐसे कई मंदिरो के बारे में सुना होगा जहाँ महिलाओ का जाना मना है। इसके चलते कभी कभी विवाद भी सामने आते रहते है।

लेकिन क्या अपने कभी सुना है किसी मंदिर में महिला नहीं बल्कि पुरुषो का प्रवेश वर्जित है। जी हाँ भारत में एक ऐसा मंदिर जहां केवल महिलाएं जा सकती हैं। इस मंदिर में यह प्रथा लंबे अरसे से चली आ रही है।

लेकिन अगर पुरूषों को यहां पूजा करने के लिए जाना है, तो एक खास तरह की तैयारी करनी पड़ती है। आज हम इस मंदिर के बारे में आपको डिटेल्स से बताएँगे

कहां है यह मंदिर

यह मंदिर केरल के कोल्लम जिले में स्थित है इस मंदिर का नाम कोट्टनकुलंगरा देवी मंदिर है। यहां देवी मां की पूजा होती है। लोगों का मानना है कि लोगों का मानना है कि यहां की अम्मा बहुत महिमामयी हैं।

लेकिन इस मंदिर में पुरुषों के लिए बनाये गए नियम का यहां सख्ती से पालन होता है। अगर उन्हें मंदिर में प्रवेश करना है, तो पारंपरिक पोशाक पहननी पड़ती है।

पुरुषों को दर्शन के नियम

अगर पुरुष इस मंदिर में दर्शन के लिए जाना चाहते हैं, तो उन्हें महिलाओं की तरह तैयार होना पड़ता है। इसके लिए उन्हें साड़ी, आंखों पर लिपस्टिक लगाने, होठों पर लिपस्टिक लगाने और सिर पर फूल लगाने पर ही मंदिर में प्रवेश दिया जाता है। 

https://www.instagram.com/p/CqPdkWKpOzv/?utm_source=ig_web_copy_link&igshid=MzRlODBiNWFlZA==

इसके लिए मंदिर में साज-सज्जा की भी व्यवस्था की गई है। कुछ लोग महिलाओं की तरह दिखने के लिए अपनी मूंछें और दाढ़ी भी हटा देते हैं। पुरुष ऐसा करते हैं, क्योंकि माना जाता है कि  स्वास्थ्य, विवाह, शिक्षा, नौकरी जैसे किसी भी समस्या को माता पूरा कर देती हैं।

क्या इसके पीछे की कहानी

दरअसल, इस प्रथा के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार एक बार साड़ी पहने कुछ चरवाहों ने पास के एक पत्थर की पूजा की। उन्होंने इसमें दैवीय शक्ति देखी और इसे कोट्टन कहा और एक मंदिर बनाया।

तब से, यहां पुरुषों द्वारा महिला पोशाक में पूजा करने की प्रथा रही है। ऐसा कहा जाता है कि इस पत्थर से नारियल पर वार करने पर खून निकलने लगता है। तभी से इस पत्थर को और भी खास माना जाता है। इसके अलावा कहा जा रहा है कि इस पत्थर का आकार बढ़ता जा रहा है।

इसके सिवा एक कथा के अनुसार कई साल पहले, ऐसा कहा जाता है कि छोटे चरवाहे लड़के मंदिर के आसपास अपने मवेशियों को चराते थे और लड़कियों की नकल करते हुए खेलते थे।

ये चंचल खेल अक्सर एक विशेष पत्थर के पास होता था। ऐसे ही एक दिन जिस चट्टान के पास वो खेलते थे, उसमें से एक देवी प्रकट हुई। जिसके बाद देवी के दर्शन के लिए पुरुषों द्वारा महिलाओं का रूप धारण करने की परंपरा शुरू हुई।